कैसी घिरी है उलझन मुझे रासता बताओ, भटकी है राह मेरी मुझे रोशनी दिखाओ, सुनता हूँ मैं कनहईया तुम हो बड़े खेवैया मझधार फँसी है मेरी जिनदगी की नैया आ कर मुझे बचाओ इसे पार तो लगाओ, गुमनाम है ये राहें नई राह तुम दिखाओ.
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